Ghalib Shayari

  1. फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल
    दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
    कोई वीरानी सी वीरानी है .
    दश्त को देख के घर याद आया
  2. हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
    बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
  3. आशिकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब,
    दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक
  4. न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता,
    डुबोया मुझको होनी ने, न होता मैं तो क्या होता?
  5. दाइम* पड़ा हुआ तिरे दर पर नहीं हूँ मैं
    ख़ाक ऐसी ज़िंदगी पे कि पत्थर नहीं हूँ मैं
  6. वादे पे वो ऐतबार नहीं करते,
    हम जिक्र मौहब्बत सरे बाजार नहीं करते,
    डरता है दिल उनकी रुसवाई से,
    और वो सोचते हैं हम उनसे प्यार नहीं करते
  7. दुःख देकर सवाल करते हो,
    तुम भी जानम कमाल करते हो,
    देख कर पूछ लिया हाल मेरा,
    चलो कुछ तो ख्याल करते हो,
    शहर-ए दिल में ये उदासियाँ कैसी,
    ये भी मुझसे सवाल करते हो,
    मरना चाहें तो मर नहीं सकते,
    तुम भी जीना मुहाल करते हो,
    अब किस-किस की मिसाल दूँ तुम को,
    हर सितम बे-मिसाल करते हो।
  8. रोज़ ये दिल बेकरार होता है,
    काश के तुम समझ सकते की
    चुप रहने वालो को भी किसी से प्यार होता है…
  9. गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
    हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
    खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
    हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
    इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
    वरना हम भी आदमी थे काम के
  10. रिश्तों में इतनी बेरुख़ी भी अच्छी नहीं हुज़ूर,
    देखना कहीं मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे..
  11. सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है
    बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
    देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
    मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है
  12. मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
    उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
  13. उनके देखने से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक,
    वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।
  14. कितना खौफ होता है शाम के अंधेरों में,
    पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते”
  15. दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
    आख़िर इस दर्द की दवा क्या है

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